पुरानी डिगो के दरवाजे का रोमांचक इतिहास

लालसोट का डिगो गांव पुराने समय मे पर्वत की खोह में बसा हुआ था । पुरानी डिगो में रावजी का महल, मंदिर, कुआँ व कुछ भवनों के खण्डहर शेष है।
आज हम पुरानी डिगो में रावजी के महल के आगे के करीब 30-40 फुट ऊंचे दरवाजे की घटना के बारे में बताते है।

रावजी के परिवार में कन्या के विवाह सम्बन्ध हेतु आये वर पक्ष के लोगो ने टिप्पणी करते हुए कहा कि और सब तो ठीक है पर दूल्हा तोरण कहाँ मारेगा ? उस समय वहाँ द्वार नही था ।


फिर विवाह के दौरान बारात आने से पहले पूर्व महल के आगे विशाल द्वार बन कर तैयार हो गया। द्वार इतना बड़ा था कि हाथी पर चढ़ कर भी द्वार पर लटके तोरण को छुआ नही जा सकता था । द्वार के आगे करीब 5-6 फुट जमीन छोड़कर चारदीवारी बनी हुई थी।

तो तोरण कैसे मारे इस पर असमंजस बना हुआ था । कन्या पक्ष भी बड़ी उत्सुकता से देख रहा था । अचानक दूल्हा हाथी से उतरा और बारात के साथ आई एक आकर्षक घोड़ी पर सवार हो गया । द्वार के सामने तो इतना मैदान भी नही था कि घोड़ी छलांग भर सके । तब दूल्हे ने दक्षिण दिशा की और से घोड़ी दौड़ाते हुए इस प्रकार छलांग भरी की दूल्हा तोरण तक पहुंच गया । तोरण मारते ही वर पक्ष व वधु पक्ष वाह वाह कर उठे । सभी स्त्री पुरूष दूल्हे की सूझ बूझ व साहस की प्रशंसा करने लगे।

सौ.- उक्त विवरण साहित्यकार ब्रजमोहन द्विवेदी जी की पुस्तक “लालसोट का इतिहास” से लिया गया है ।

1 Comment

  1. बहुत बढ़िया जानकारी

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